Custom Pages
[vc_separator type='transparent' color='' thickness='' up='20' down='7']
Portfolio
[vc_separator type='transparent' color='' thickness='' up='20' down='7'] [vc_separator type="transparent" position="center" up="12" down="16"]
 

पैसा

पैसा

ज़माना आ गया कैसा
जिधऱ देखो उधर बस
हाय पैसा हाय पैसा
दर्जा बढ़ने लगा है पैसों का
छूट गया है साथ अपनों का खरीद लो जो मर्ज़ी पैसों से
दाम भी लगने लगे हैं
अब सपनों के
रहा ना ईमान
ना रही इंसानियत
ज़ब आ जाए पैसा
तो दिखती है असली नीयत 
पैसों से रिश्ते तोलने लगे हैं
क्यूंकि पैसे भी अब बोलने लगे हैं
आदमी बना गया है नौकर
पैसे को बनाकर है अपना सर ( मालिक )
पैसे ने बाकी ना छोड़ी
कोई कसर
पैसे के इशारे पर
सब नाचने लगे हैं
पैसे से हर कोई बिकने लगे हैं
मानव ही मानवता का गला काटने लगे हैं
लम्बे अरसो के बाद मिलने पर किसी से
लोग पूछते हैं अक्सर ऐसा,
खैरियत तो ठीक है साहब, "पर ये बताइये, आपके पास है कितना पैसा "
ज़माना आ गया कैसा
जिधर देखो उधर
बस हाय पैसा
No Comments

Post A Comment