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यारी

यारी

खुदा ने बख्शी है हमें ये दौलत यारी की,
है जहाँ में सबसे ऊँची शौहरत यारी की।
यूँ तो अनगिनत अरमां हैं मेरे दिल में मगर,
सबसे खूबसूरत है उनमें हसरत यारी की।
मेरे जाने के बाद ढूँढना कमरे में मेरे जाकर,
कोने में इक रखी होगी वसीयत यारी की।
लापरवाह हूँ मैं मुझे मेरी फ़िक्र नहीं मगर,
तंदरुस्त चाहता हूँ हरपल तबियत यारी की।
जन्नत के मानिंद यहाँ क्या-क्या करते रहते हैं,
हमें मिली है मुकम्मल यहाँ जन्नत यारी की।
ज़िन्दगी में कभी वो तन्हा हो नहीं सकता,
कोशिशों से बढ़ाता है जो ज़ीनत यारी की।
अपनी आदत से फकत खुदगर्जी निकालकर,
गंगाजल-सी रखी है हमने नज़ाफ़त यारी की।
रेलगाड़ी के पहियों-सी साथ-साथ चलती है,
साथ निभाने की रहती है फितरत यारी की।
सब कुछ दे नहीं सकता इश्क़ ये महबूब का,
कुछ हिस्सा जो देती है ये मोहब्बत यारी की।
तुम्हारे लिए है क्या ये तुम्हारी तुम जानो मगर,
हमारी तो सीधी सादी-सी है ये आदत यारी की।
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