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आज़ादी का वो दीवाना था

आज़ादी का वो दीवाना था

देश में वो जाना माना था,
एक अलग ही अफसाना था,
क्या कहें उसकी बातें,
आज़ादी का वो दीवाना था,
चंद्रशेखर नाम उसका,
पर सूरज सा चमकता था।
ऐसा वो दीवाना था,
खुद को ही "आज़ाद" कहलाता था,
देश का जो अपमान करे तो,
उसका खून खौल जाता था।
अंग्रेज़ो से जब टकराता था,
खुद पे पत्थर औऱ लाठी खाता था,
खुशियाँ उसका चेहरा चमकातींं,
जब वो जेल जाता था।
ना पसंद उसे अंग्रेज़ हुकूमत,
सो खुद का खून बहाता था,
जोश प्राण में और हिम्मत बदन में,
सबसे आगे आता था।
नामंज़ूर थी अंग्रेज़ की गोली,
सो खुद ही गोली से मर पाया था,
आत्महत्या कहाँ थी ये ?
1931 का वीर सपूत कहलाया था।
देश के लिये जिया था, देश पे ही मर जाना था,
देश का ये वीर जवान,
चंद्रशेखर नाम उसका,
पर सूरज सा चमकारा था।
2 Comments
  • Nirali Lakhia
    Posted at 11:48h, 06 August Reply

    Superb poetry…

  • Pinky Fadia
    Posted at 15:40h, 06 August Reply

    Awesome

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