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अब तक का सफ़र

अब तक का सफ़र

ग़मों की शाम, खु़शी की सहर,
कुछ इस तरह है अब तक का सफ़र।
कहीं मीठी ज़बान, कहीं तीखी नज़र,
कुछ इस तरह है अब तक का सफ़र।
लहरों सी मचलती हुई,
तूफान के साये में पलती हुई।
करवटे बदलती, कभी इस पहर कभी उस पहर,
कुछ इस तरह है अब तक का सफ़र।
मझधार की कहानी भी है,
मौजों की रवानी भी है।
कभी खामोश तो कभी कहर,
कुछ इस तरह है अब तक का सफ़र।
शिद्दत भरी तपिश कहीं।
प्यार भरी कशिश कहीं।
सुबह-शाम, दिन दोपहर,
कुछ इस तरह है अब तक का सफ़र।
गुलों से सजा गुलशन कभी,
कलियों से महका आंगन कभी।
सेहरे से गुज़र कर होती है बसर,
कुछ इस तरह है अब तक का सफ़र।
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