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शब्दकोश

शब्दकोश

आज लिखने की कोशिश मैंने बहुत की,
लेकिन मन का शब्दकोश खाली है।
निशब्द बैठा हूँ,
लोगों की भीड़ में,
तुम कह रहे शांत क्यों हूँ।
रहस्यमयी चित्र देख रहा, चेहरों के जंगल में,
हर तरफ कंकाल दिख रहे,
हड्डियाँ चल रहीं,
नर कंकाल थिरक रहे,
कुछ मिट्टी ओढ़े,
कुछ पाषाण से खड़े हैं,
कुछ ताबूत में बंद हैं,
स्वप्न है या सत्य विचित्र पहेली में खोया हूँ।
विस्मित स्वर गूँज रहे कानों में,
स्वर बड़े ही गहरे हैं,
चित्कार, भाषा का रूप लिए,
अदृश्य हवाओं में बह रहीं,
आज लिखने की कोशिश मैंने बहुत की,
लेकिन मन का शब्दकोश खाली है।
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