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शहादत

शहादत

कफ़न तिरंगा हो, सेना की शहनाई हो।
मेरी अंतिम येही इच्छा, शहीद की ऐसी विदायी हो।
धरती माँ के आँचल को, खून से अपने लाल करूँ,
जो छुए मेरे देश की मिट्टी, उसका सीना चार करूँ,
इन हथेलियों पे हों, मेरे खून के धब्बे, मेरी ऐसी सगाई हो,
कफ़न तिरंगा हो, सेना की शहनाई हो।
सब कहें एक ही सुर में, शहीद की ऐसी विदायी हो।
न फूलों की माला हो, न नीर कोई बहाये,
मेरी शहादत पे, हर कोई मुस्काये।
माँ का एक आँचल मिले, बहन की एक राखी हो,
कफ़न तिरंगा हो, सेना की शहनाई हो।
सब कहे एक ही सुर में, शहीद की ऐसी विदायी हो।
हर बच्चे में मेरी एक पहचान बने,
वो भी इस देश का कोई महान बने,
हवा में फैली खुशबू, मेरी कहानी की सच्चाई हो,
कफ़न तिरंगा हो, सेना की शहनाई हो।
मेरी अंतिम येही इच्छा, शहीद की ऐसी विदायी हो।
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