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लिखना मेरा जुनून है

लिखना मेरा जुनून है

ज़िन्दगी में कुछ पलों का सुकून हैं,
बिना क़लम के हाथ ये बेज़ान हैं,
कभी जिंदगी के ज़ज़्बात लिखता हूँ,
तो कभी मौत का अकस्मात आना लिखता हूँ,
लेखक हूँ,शायद लिखना मेरा जुनून है,
इसलिए ख़ौफ़ होते हुए भी ख़ुदा का
बेख़ौफ़ अपने इरादे बेहिसाब लिखता हूँ।
मुक़म्मल नहीं होती हैं रचना मेरी,
कभी ईश्वर पर हाथों को मोड़कर लिखता हूँ,
तो कभी अल्लाह पर हथेलियों को जोड़कर लिखता हूँ,
कहीं मंदिर में पालथी में बैठकर लिखता हूँ,
तो कहीं मस्ज़िद में घुटनों को मोड़कर लिखता हूँ,
लेखक हूँ,शायद लिखना मेरा जुनून है
इसलिए धर्मों के मोह में नहीं
बस कर्मों की चाह में बेधड़क लिखता हूँ।
वक़्त की ताक़त नहीं नियत हैं मेरे,
कभी शान्ति की स्थापना के लिए लिखता हूँ,
तो कभी क्रांति को अपनाने के लिए लिखता हूँ,
कभी किसी की सिसकियों को लिखता हूँ,
तो कभी किसी की हुँकार को लिखता हूँ,
लेखक हूँ,शायद लिखना मेरा जुनून है,
इसलिए पतन के अनुभूति को भाँप कर
उत्थान के आगमन की सोचकर लिखता हूँ।
फासले की चाहत है मेरी फैसले की घड़ी नहीं,
कभी प्रेम को सम्पूर्ण करने के लिए लिखता हूँ,
तो कभी नफ़रत को अपूर्ण करने के लिए लिखता हूँ,
कहीं दोस्त की वफ़ादारी लिखता हूँ,
तो कहीं दुश्मन की ग़द्दारी लिखता हूँ,
कभी माँ का आँचल लिखता हूँ,
तो कभी पिता का त्याग लिखता हूँ,
लेख़क हूँ,लिखना मेरा जुनून है,
इसलिए प्रत्यक्ष को प्रमाण के साथ,
और कर्तव्य को निष्ठा में पिरों के लिखता हूँ।
लेख़क हूँ,लिखना मेरा जुनून है,
इसलिए सिर्फ़ संसार को लिखता हूँ।
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