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मेरा ईश्क़

मेरा ईश्क़

मेरा ईश्क़ तुझसे लिपट गया, मेरी रूह तुझमे उलझ गई,
मेरी ज़िंदगी का तू ईनाम सा,
मैं तेरे लिए महज़ एक हादसा,
मैं चाहूं तुझे इंसान सा, मुझे मिले ना तू भगवान सा,
ये मेरे प्रेम की परिभाषा है, तू है इस से अनजान सा,
दिल तोड़ गया, मुझे छोड़ गया,
सब कर गया वीरान सा,
जो बाकी है अब मुझमे, न जानु मैं वो कौन है?
बैठी है चुपचाप सी, उस दिन से ही वो मौन है,
ना राज़ वो दिल का खोलती, सिरहन ना चुप्पी तोड़ती,
गुम है किसी तड़पन में, इस तड़प को हर दिन टटोलती,
मैं पूछती हूँ क्या बात है, क्यों आँखों में बरसात है,
अब खुद से भी ना कुछ कह पाती है,
आईने में भी नज़रे चुराती है,
आँखों में एक तसवीर है,
कुछ तेरी ही तरह नज़र आती है,
पर तुझे कहाँ अंदाज़ा था,
हवस का स्वाद ज़रा ज़्यादा था,
तूझे चाहत दिल की भी ना थी,
वो जान भी तुझपे लुटा बैठी,
तू जिस्मों को मिलाने में रह गया,
"हयात" रूह तुझसे उलझा बैठी।
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