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कब कौन आया..

कब कौन आया..

जाने वाले चले गए,
रौनक-ए-महफ़िल वीरान हुई,
शब्दों की गठरियाँ समेट लो अब,
आज फिर इक़ महफ़िल शमशान हुई।
कब कौन आया हमेशा के लिए,
हर एक दिन के बाद, शाम आती है निशा लिए,
कुछ एकाद यादों में रह जाते हैं,
जो आशिक हैं, आशिक़ी का नशा लिए एक लिबास उतारकर चला गया वो,
फिर लौटेगा,
इस दफ़ा नई पोशाक, नया पेशा लिए।
https://www.facebook.com/shlesh.gautam.9/videos/1610076232487402/
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