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आज़ादी का जश्न

आज़ादी का जश्न

लहू से सींची, जिसने ये धरती,
आज़ाद देश के वो वीर हैं।
लहराता है जो तिरंगा,
खींची गई वो शमसीर है।
आजादी के मतवालों ने,
रंगा बसन्ती चोला।
शहीद हुए भगत सिंह,
कितनो ने दम तोड़ा।
राखी टूटे, सिंदूर छूटा,
आँगन हुआ सूना।
आज़ादी के मतवालों तुम,
यूँही न इसे खोना।
खुशी मनाओ, मौज उड़ाओ,
जितना चाहे जश्न मनाओ,
लहू से लाल हुई है धरती,
वीर गाथा सब को सुनाओ।
स्वतंत्रता दिवस सब मिलकर मनाओ।
वीर गाथा सब को सुनाओ।
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