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मोहब्बत का किस्सा

मोहब्बत का किस्सा

जिन्दगी का एक हिस्सा मोहब्बत का किस्सा,
उठता है हर रोज सवाल जिससे उससे जुड़ा है ये रिश्ता।
चाहा जिसे जिन्दगी की तरह वो कोई बुखार तो नहीं,
होते हैं सारे सवाल तुझसे कहीं तू मेरा जवाब तो नहीं।
बनते बिगड़ते रिश्तों से सवाल क्यों करे,
हम ये जिन्दगी किसी के नाम क्यों करे।
बस कुछ समय ही जो रहा साथ मेरे,
उससे जिन्दगी भर के साथ का सवाल क्यों करे।
जो चल रहे हैं आज साथ मेरे इनके कल का भरोसा नहीं,
देखा था मैंने बस एक ख्वाब ये जिन्दगी का संदेशा नहीं।
संभल कर चलना है इस राह पर यहाँ दिल के हिस्से बहुत होते हैं,
टूटे हैं जो इस राह में चलते हुए मशहूर उन्ही के किस्से होते हैं।
किस्से कहानियों की बात ही अलग है ये कभी सच्चे नहीं होते हैं,
जिन्दगी में मिले सारे मुसाफिर अच्छे नहीं होते हैं।
एक मोहब्बत के किस्से के लिए अपनी जिन्दगी न बर्बाद कर लो,
देखो समझो चल सको तो साथ चल लो मोहब्बत के किस्से को एक कहानी कर लो।

दो पल के साथ से नहीं बनते रिश्ते यहाँ इन्हे निभाना भी पड़ता है,
टूटे हुए ख्वाबों में कभी मोहब्बत के किस्से नहीं होते।

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