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आज़ादी

आज़ादी

बेशकीमती है ये आज़ादी,
बहुत कुछ गवांकर के हमने पाई है,
इस मिट्टी की रक्षा की ख़ातिर,
लाखों ने अपनी जान गवाई है।
ना जाने कितनी माताओं के,
खोकर सपूत, कोख हुए विराने थे,
ना जाने कितनी ही सुहागनों के,
अपने माँग का सिंदूर जुदा था हुआ।
भूलकर अपना सुख-वैभव,
जीवन अपना देश के नाम किया,
है धन्य हर वो वीर जिसने,
मातृभूमि पर सर्वस्व वार दिया।
निस्वार्थ कर्म और संघर्ष से,
इस पावन माटी का कर्ज उतार गए,
है नमन उन्हें हम सबका जो,
खुद को मिटा देश आज़ाद कर गए।
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