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ऐ वतन

ऐ वतन

ऐ वतन
होंगे हज़ारो रंग तेरे,
होंगीं करोड़ो की आबादि,
लाखों त्यौहार होते होंगे,
कई जाती धर्म रेह्ते होंगे,
भिन्न बिबाद और चर्चे होते होंगेे,
करते होंगे कई इंसान तुझसे दगा।
ऐ वतन
पर है तो हम सब एक ही माटी के,
करते होंगे यह सारे भिन्नता समाज की रीतों मे,
लेकिन फिर भी कहलाते हैं,
हम वासी भारत के।
अनेको में एक जो यह हमारा देश धर्म है,
जहाँ दगा करके भी मर जाएंगे सिर्फ इस माटी के लिए,
सरहदो में रक्षा करके भी शहीद हो जाऐंगे,
भारत माँ सिर्फ तेरे लिए।
ऐ वतन भले ही तुझसे हो कोई ख़फ़ा पर,
तेरे लिए है यह हमारा जीवन भी त्याग का नामा।
कोटि कोटि नमन है ऐ भारत माँ,
तूझसे ही है जिन्दगी हमारी
तुझी से है ख़ुशी हमारी।
हैं हम कोनो में बिसर्जित पर,
यह तीन रंगो का ध्वज आज भी लाता है,
हम सभी को साथ ओ सज्जीत।
ऐ वतन है तुझको हमारा शत् शत् नमन।
जय हिन्द॥
जय भारत॥
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