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तुझमें रब दिखता है

तुझमें रब दिखता है

तेरे सूरत की दीवानी हूँ मैं,तेरे नूर की कायल हूँ,
तुझे दिखता है चांद मुझमें, मुझे तुझमें शब दिखता है।
तुझसे क्या मांगू मै,जब तुझे ही दुआओं में मांगा है,
यूंही नहीं तुझे चाहा मैने,मुझे तुझमें सबब दिखता है।
मेरी दुआओं का असर है तू,तुझसे ही मुक्कमल हूँ मैं,
तेरे बिना शायद कुछ नहीं मैं,मुझे तुझमें मज़हब दिखता है।
तेरा सजदा करने की मैने,रब से इजाज़त मांगी है,
तेरी ही आयात पढ़ती हूँ,मुझे तुझमें रब दिखता है।
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