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कैसा हुआ तू

कैसा हुआ तू

तू ख्वाब कोई ताबीर हुआ,
मेरा ईमान तेरी जांगीर हुआ,
मैं इश्क़ करूँ तो कैसे तुझको,
मैं बैठे बैठे यूँ ही फ़क़ीर हुआ।
तू रंग बहारों का झीलों में,
मैं बदरंग सा कंकड़ किनारों पे,
तू महक सौंधी सी कलियों में,
मैं मुरझाया सा खोया हूँ हज़ारों में।
तू नज़र ए इनायत खुदा की,
तेरी हर अदा भी है जुदा सी,
मैं इश्क़ करूँ तो कैसे तुझको,
मेरी अक्ल-ओ-सीरत अब है फिदा सी।
तू नायाब नगीना नूरानी है,
तुझे देख मुझे बड़ी हैरानी है,
कायनात से भी ज़्यादा खूबसूरत,
तू खुदा की प्यारी सी शैतानी है।
तू अक्स पहाड़ों की झीलों में,
मैं रेत सा बहता रेगिस्तानी टीलों में,
मैं इश्क़ करूँ तो कैसे तुझको,
मिलते नहीं दो किनारे मिलों में।
तू खुशबू सौंधी मिट्टी की,
धुंधली स्याही पुरानी चिट्ठी की,
तू सौंधी सुगंध सुमन सुरभित की,
मस्तिमय यादें गर्मियों की छुट्टी की।
मैं इश्क़ करूँ तो कैसे तुझको,
मैं खोज रहा हूँ अब भी खुद को,
मजबूर हूँ मगर मायूस नहीं,
पूरा सा हो गया हूँ मिल के तुझको।
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