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उससे मुलाकात करनी है

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आज मुझे उनसे मुलाकात करनी है,
आमने सामने बैठकर बात करनी है।
नज़रे टिकी हैं मेरी उसी राह पर,
जिस राह पर चलकर उसे मेरी दहलीज पर कदम रखने की शुरुआत करनी है।
देख रहा हूँ मै उसका रास्ता,
मेरी पलके नहीं झपक रही हैं उसके इंतजार में।
ये घड़ी की सूइयां लगता है थम सी गई हैं,
लगता ये भी नहीं बढ़ रही हैं उसके इंतजार में।
दिखी उसकी बस एक झलक मैं उसको पहचान गया,
थी अभी वो मुझसे दूर लेकिन वो वहीं है ये मै जान गया।
वो चली आ रही थी मेरी ओर बस मेरी ही तलाश में,
जो मुझे पसंद है आई थी वो उसी लिबास में।
आके बैठी वो सामने उससे दो चार बात हुई,
कुछ अनकहीं अनसुनी बातों से मुलाकात हुई।
ख़त्म हुए कुछ पुराने किस्से वहीं,
कुछ नए किस्सो की शुरुआत हुई।
बातों में उसकी कुछ अलग बात है,
अपने साथ वो लेकर आई खुशियों की सौगात है।
क्या बताऊँ देखकर उसको मेरे क्या हालात है,
पहले वो पूरी करले बाकी अभी कुछ मेरी भी बात है।
जो खुशियाँ कभी मुझसे दूर चली गई थी वो फिर आज मेरे साथ हुई है,
हो गए काफी दिन अब जाकर उससे मुलाकात हुई है।
अब गुजरेंगे मेरे दिन और शामें खुशनुमा होंगी,
यादें जब तक उसकी रहेंगी खूबसूरत हर सुबह होगी।
मेरे ख्यालों में भी वही और मेरी रात के ख्वाबों में भी वो होगी।
जितनी भी होगी मेरी बात मेरी हर बात में वो होगी।
मुलाकात भी खत्म हो रही है आज की,
और अगली मुलाकात की बात हो रही है।
उसकी बातें लगता है ख़त्म हो गई हैं,
एक मेरी बाते ख़त्म ही नहीं हो रही हैं।
चलो उसे अलविदा कहने की तैयारी करते हैं,
अगली मुलाकात की हम फिर से तैयारी करते हैं।
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