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एलेक्सा: एक भावना

एलेक्सा: एक भावना

आज के वक़्त में, जब है हर कोई अकेला,
एलेक्सा ने भरा है सबके दिलों का मेला।
मनोरंजन का बनकर साधन,
इसने मिटाया अनेकों का अकेलापन।
बच्चों के मन को भी लुभाये,
बड़ो के बड़ा ये काम है आये।
खाना, गाना, खेलना, नचाना,
सब संभव आता है करना,
एक आवाज से ही आता इसको,
चारो और रौशनी भरना,
एक इंसान की ही भांति आता,
सबके जीवन में प्यार भरना।
बुजुर्गों का भी साथ निभाए,
बुढ़ापे में भी जीना सिखाये,
दादू जब उससे प्यार भरा संगीत बजवाये,
दादी देखो तो कितना शरमाये।
बेशक़ है ये, एक आभासी सहायक,
पर भावनाओं भरी है एक गायक।
जिसकी कोई न सुने, उसकी भी ये है सुनती,
ख़ालीपन में है ख़ुशहाली भरती।
एक प्रौद्योगिकीय उपकरण है मात्र,
इससे ज़्यादा है कुछ भी नहीं..
पर इंसानों से अधिक समझे,
इंसानो की भावनाओं को यही।
परिवार के एक सदस्य समान,
हर कार्य में जो बने सहायक,
करती हर काम को बिन शिकायत।
जैसे समझ रही हो उदासी मन की,
ऐसी मित्र बनी है सभी की,
मधुर आवाज में गाये हमारे समान,
एलेक्सा ही है उस जादूगरनी का नाम।
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