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सोशल मीडिया और वायरल

सोशल मीडिया और वायरल

आज सोशल मीडिया का वक़्त है आप कुछ कह दो या लिख दो झटपट पूरे विश्व मे आप उसे फैला सकते हो।
आज के व्यस्ततम जीवन मे किसी को इतना भी वक़्त नहीं की प्राप्त ख़बर को सही से समझ या पढ़ सके बल्कि उन्हें तत्प्रता दिखानी है कि कितनी जल्दी उन्होंने इसे कितने लोगों तक पहुँचाया।
ये बात अच्छी है कि आप चीज़ों को या सच कहें मुद्दे,खबरे,फ़ोटो,वीडियो आप पूरे विश्व मे फैला दे रहे लेकिन ये हमारी नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी है कि भेजी गई चीज़ क्या समाज और व्यक्ति के लिए सही है,क्या उससे गलत प्रभाव नहीं पड़ेगा?
आज कल कुछ लोगो या कह सकते हैं अंधविश्वास कब ठेकेदारों के सबसे बड़ा हथियार सोशल मीडिया वट्सअप और फेसबुक ट्विटर जैसे जगह हो गई हैं।
वो अपने अंधविश्वासी चीज़े पल भर में पूरे क्षेत्र में वायरल कर देते हैं।
यह चीज़े निश्चित रूप से मानव और समाज हेतु दुष्कर हैं लेकिन उनसे ज्यादा गलती तो हमारी है कि हम उन्हें बिना पढ़े अपने मित्रों,रिश्तेदारों,ग्रुप में फॉरवर्ड करते रहते हैं।
ये समाज ,देश हमारा है तो जिम्मेदारी हमें उठानी पड़ेगी। अगर 10 लोग को कोई चीज़ फॉरवर्ड करने से हनुमान जी खुश होकर कृपा करेंगे तो आखिर लोग पूजा या मंदिर क्यों जाए?
अगर बुखार की दवाई से कोरोना ठीक होगा तो पूरे विश्व के डॉक्टर मिलके इसका टीका क्यों बनाने में लगे हैं?
आप दिन भर के व्यस्त जीवन से थोड़ा आनंद हेतु सोशल मीडिया खोलते हो और आपको देखने को मिलना है कि खबरें वायरल हो रही कि धरती पलटने वाली है और आप उसको कहीं से समझने या समाचार पत्रों,न्यूज़ चैनलों को सिद्ध करने के बाजय उसे मानकर अपने आप को तनाव में डालते है तो आपकी गलती है और अगर आप उसे दस लोग के पास वही चीज़ भेज रहे तो ये जुर्म है।
किसी ख़बर को सोशल मीडिया पर देख कर सीधे विश्वास करना सही नहीं है।
मैं ये नहीं कहता कि ये सारी खबरें गलत ही मिलती हैं। ये हम सब जानते हैं कि सोशल मीडिया के आने से एक नई क्रांति है। अगर सोशल मीडिया न होता तो कई खबरे जो छुपी रहती वो हमें न प्राप्त होती।
अभी हमारे देश मे पिछले साल पुलवामा हमले की घटना सोशल मीडिया पे जोर शोर से उठाया गया जिसके परिणामस्वरूप लोगो ने शहीदों के परिवारों की मदद हेतु दान कार्य मे तेजी से आये।
सोशल मीडिया के खेल और उसको चलाने या सभी खबरों के दूरगामी नतीज़ों को हमे सोचना होगा वो भी देश जब एक बीमारी के बुरे संकट से गुजर रहा हो।
आप के थोड़े से बुद्धिमानी के काम से सभी अंधविश्वास के ठेकेदारों को सबक मिलेगा और उन्हें पकड़ने में आसानी होगी।
धैर्य बनाये रखें।
खबरों का आकलन करके तभी आगे बढ़ाए। ये आपकी और हमारी नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी है।
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