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मेरे दिल ने जो सुनना चाही, वो बातें तुमने सुनाई नहीं

मेरे दिल ने जो सुनना चाही, वो बातें तुमने सुनाई नहीं

मेरे हमदम मेरे प्रियवर, क्या याद हमारी आई नहीं,
मेरे दिल ने जो सुनना चाही, वो बातें तुमने सुनाई नहीं।
आलिंगन अविराम, तरलता तेरे मेरे नेह अंदर,
एक रिश्ता पलता रहा है बरसो से इस देह अंदर,
उस रिश्तें की देख जवानी को तुम क्यूँ मुस्काई नहीं,
मेरे दिल ने जो सुनना चाही, वो बातें तुमने सुनाई नहीं।
अपने दिल की सुनों वो बातें जो तुमने दबा रखी,
मार के अपने ज़ज़्बातों को ये कैसी सूरत बना रखी,
जग सागर की लोक लज्जा में मेरी महक मिटाई गई,
मेरे दिल ने जो सुनना चाही, वो बातें तुमने सुनाई नहीं।
कभी घटा में लहराती बिजली से तुम डरती थी,
न्योछावर उन पल पर जब तू मेरी बांह पसरती थी,
उन बाहों की महक तुम्हारे अंदर अब भी समाई नहीं,
मेरे दिल ने जो सुनना चाही, वो बातें तुमने सुनाई नहीं।
बात बतंगड़ हो जाती जो राज राज ना रहें अगर,
जीत के दिल के ज़ज़्बातों को पर्दों में छुप गए मगर,
उन ज़ज़्बातों के आसमान में तेरी ही आवाजाही रही,
मेरे दिल ने जो सुनना चाही, वो बातें तुमने सुनाई नहीं।
शीशे सा किरदार मेरा दो टूक तड़क गर जाएगा,
खनक से सारी दुनियां को ये राज पता चल जाएगा,
कि एक पतंगें की शमा में जलकर जहाँ से विदाई हुई,
मेरे दिल ने जो सुनना चाही, वो बातें तुमने सुनाई नहीं।
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