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मेरे मित्र गणेश

मेरे मित्र गणेश

होकर मुझ पर सवार
जब तुम सैर को जाते हो,
अकृता रूप में तुम सबको
बड़ा गजब भाते हो।
अलमपता है रूप तुम्हारा
कर न सके कोई विनाश,
चाहे क्यूँ न मिल जाएं
पाताल, धरती और आकाश।
आद्वितीयरूपी प्रभु हो तुम
है सब पर तुम्हारा आशीष,
पूरी दुनिया के ईश्वर हो कहलाते
अमित, अविग्र और अवनीष।
बाल चन्द्र बन जाते हो तुम
लिए शिखर पर चंद्रमा,
सबसे पहले हो पूजे जाते
बाल गणेश तुम, बलशाली भीमा।
तुम गणपति, तुम गजानन
तुम ही मेरे मित्र गणेश,
तीनों लोकों के देवी-देवों में
एक तुम ही मेरे विशेष।
हर संकट को हरने वाले
तुम हो सिद्धि-विनायक,
तुम ही मेरे एकमात्र स्वामी
और मैं तुम्हारा मूषक।
8 Comments
  • Nisha
    Posted at 03:02h, 30 August Reply

    Nice 🧡🧡🧡

  • Piu Saha
    Posted at 08:05h, 30 August Reply

    GANPATI BAPPA MORYA……🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏………amder k ei sonkoter hat theke plzzzz taratari bachauuuuu…….

  • Sourav kumar
    Posted at 14:56h, 30 August Reply

    Very good 👌

  • Margret Marandi
    Posted at 15:26h, 30 August Reply

    Nice

  • Anuj Immanuel Marandi
    Posted at 15:46h, 30 August Reply

    बहुत ही सुंदर रचना है।

  • Smrity Shekhar
    Posted at 05:01h, 31 August Reply

    Lovely. Keep writing. ❤

  • Kabita Saha
    Posted at 12:40h, 31 August Reply

    Kabita Saha

  • Kabita Saha
    Posted at 12:44h, 31 August Reply

    Jai Ganpati Bappa 🙏
    Beautiful creation

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