Custom Pages
[vc_separator type='transparent' color='' thickness='' up='20' down='7']
Portfolio
[vc_separator type='transparent' color='' thickness='' up='20' down='7'] [vc_separator type="transparent" position="center" up="12" down="16"]
 

यादों का काफिला

यादों का काफिला

मेरी यादों का काफिला बचपन की गलियों, 
मायके की दहलीज पर जा रूका।
भावुक था मन, नन्ही चिड़िया सा उड़ चला,
पहुंची मायके, भाई भाभी ने किया स्वागत,
पिता की बूढ़ी आँखों ने छलकाए ढेरों आशीर्वाद, 
मां मिली भीगे नयन,
हैरान थी खुद पर बदल गए थे रिश्ते या बदला था घर का वातावरण,
अंदर की बेटी ना जाने कहाँ थी गुम,
दिखावे की हँसी, औपचारिक बातें, अजीब सा बेगाना पन,
क्या यह वही दहलीज थी, जहाँ से निकली थी दुल्हन बन,
वही आँगन, वही छत वही तारों भरा गगन,
छू कर देखा कुछ ना बदला था,
लगा है बस मेरे मन का भरम,
सहेलियाँ, बचपन के खिलौने,
ढूंढती रही मेरी तरसती आँखें, कहाँ गए वो मेरे सपने,
घर वहीं था परिवार वहीं था, पर शायद मेरे दिल का किवाड़ खुला नहीं था,
मेरे अंदर छोटी सी बच्ची सांकल लगा सिसक रही थी,
माँ कुछ रुपए, साड़ी, मिठाई लिए तैयारी में लगी थी,
जल्दी आया कर, कुछ दिन मेरे पास भी ठहर,
मेरे बाद कोई नहीं पूछेगा, माँ से होता मायका,
बड़ी हो तेरे आँसू कोई नहीं पोछेगा,
हाँ हाँ कर जैसे ही भीगे गाल पोंछे,
माँ की नसीहत, प्यार भरा आंचल कहीं ना था,
मेरी यादों का काफिला, मुझे छोड़, आगे बढ़ गया था।
No Comments

Post A Comment