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ऑनलाइन बनाम ऑफलाइन

ऑनलाइन बनाम ऑफलाइन

कल तक जहाँ दुनियाँ
बुकों में जीवित थी,
आज वही दुनियाँ
ई-बुक में सम्मिलित हैं।
कल तक जहाँ हर जानकारी
किताबों में रचित थी,
आज वही सारी जानकारी
इंटरनेट पर प्रमाणित हैं।
कल तक जहाँ ख़याल
कागज़ों पर लिखा जाता था,
आज वही सारे ख़याल
नोटपैड पर छापे जाते हैं।
कल तक जहाँ इश्क़
दोस्तों के सेटिंग से होता था,
आज वही इश्क़ ऑनलाइन
चैटिंग के तरीके से होता है।
कल तक जहाँ मुलाकाते
हाथ मिलाने से पूरी होती थी,
आज वहीं मुलाकाते हमारी
ऑनलाइन वीडियो कॉल से पूरी होती हैं।
कल तक जहाँ मीटिंग
मेज के चारों और बैठकर होतीं थीं,
आज वहीं मीटिंग हमारे
कैमरे के सामने बैठकर होतीं हैं।
कल तक जहाँ शिक्षा के
ख़ातिर कोचिंग के दरवाजे तक जाना पड़ता था,
आज वही कोचिंग
हमारे मोबाइल में उपास्थि रहती हैं।
पर कहते हैं ना
एक ही सिक्कें के दो पहलू होते हैं।
ऑनलाइन हर आवश्यक वस्तु
हमें आसानी से एक जगह मिल जाती हैं,
तो ऑफलाइन में हर वस्तु के लिए
जगह जगह भटकना पड़ता हैं।
ऑनलाइन किसी को भी संदेश
शीघ्रता से पहुँचाया जा सकता है,
तो ऑफलाइन में उसी संदेश
को पहुँचने समय लग जाता हैं।
ऑनलाइन में हर ख़बर हमे
आसानी से मिल जाती है,
चाहें वो आवश्यक हो या अनावश्यक,
तो ऑफलाइन में हम उस
खबर तक पहुँचते हैं जो लगती है हमे आवश्यक।
पर शायद ऑनलाइन में हम जितनी
जल्दी कहीं या किसी तक पहुँच जाते हैं,
चाहे वो ख़बर हो या अफ़वाह
चाहे तो वस्तु हो या इंसान।
ऑनलाइन हम हर ज्ञान अर्जित कर सकते है
लेक़िन ऑफलाइन में हमे
सांसारिक, सामाजिक महत्व का पता चलता है,
ऑनलाइन में परायों को अपना
बनाने की होड़ में
शायद हम अपनों के दौर से दूर होते जा रहे हैं।
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