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एक ऐसा रिश्ता जो हमे खुद से जोड़े रखता है,
एक ऐसा नाता जो कभी टूटता नही है,
एक ऐसा संबंध जो समय के साथ गहरा हो जाता है,
एक ऐसा लगाव जो कभी मिटाया नही जा सकता है।
क्या लिखूँ अपनी कलम से तेरे बारे में ए दोस्त,
तू तो मेरी रग रग में समाया है,
क्या तारीफ करूँ अपनी जुबान से हे मित्र,
तुम तो मेरी ज़िंदगी के हर हिस्से में समाए हो।
तुम्हारे बिना एक पल भी सज़ा लगती है,
तुम्हारे साथ हर बेकार चीज़ भी अच्छी लगती है,
तुम्हारे साथ बिताया हर लम्हा खास होता है,
तुम न हो तो हर दिन शमशान लगता है।
हाँ माना लड़ाई हम कम नही करते,
हाँ माना मुँह भी हम कम नही फुलाते,
हाँ माना कह देतें हैंं कुछ अपशब्द भी,
पर ए मेरे दोस्त जी भी नही सकते तुमसे जुदा होकर।
वो स्कूल साथ मे जाना,
वो कैंटीन में साथ मे खाना,
वो बंक मारकर खतरों के खिलाड़ी बनना,
और वो प्रिंसिपल के केबिन में बार बार जाना।
वो सज़ा भी तेरे साथ खूबसूरत हो जाती थी,
वो हर दिन की डांट भी तेरे होने से अच्छी लगने लग जाती थी,
वो बस की सीट भी तो तेरे लिए ही रुकती थी,
और कुछ इसी तरह तेरे होने से ही ज़िन्दगी चलती थी।
याद है वो पल आज भी मुझे,
जब टूटे हुए दिल को कैसे सहलाया था तूने,
याद है वो चिट्ठी आज भी मुझे,
जो मेरे नाम लिख पहुँचा दी थी तूने।
सब मेरी ज़िन्दगी से धीरे धीरे जाते रहे,
तुम्हे हमसे अच्छा मिलेगा ये दिलासा भी देते रहे,
लेकीन समय के साथ तू न बदला मेरे यार,
इसलिए तू ही है मेरा पहला प्यार।
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