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आस्था

आस्था

हमारी आस्था पत्थर को भगवान बना देती है,
भगवान की मूर्तियों में भी जान डाल देती है,
मानती हूँ हमने ईश्वर को कभी नही देखा,
हमारी आस्था हमे ईश्वर के दर्शन करा देती है।
हमारी आस्था गंगा को भी माँ बना देती है,
हमारे हर पाप को धोकर हमे पवित्र कर देती है,
अगर न मानो तो गंगा बस बहता पानी है,
पर हमारी आस्था इन्हें पूजनीय बना देती है।
आस्था सच्ची हो तो भगवान भी अवतरित होते हैं,
हमे हर दुविधा से निकालने वो स्वयं आते हैं,
दुनिया मे कितने भी पाप क्यों न बढ़ जाए,
पापियों का नाश करने वो जरूर आते हैं।
शबरी की आस्था ही तो थी श्री राम में,
कितना भी वक़्त क्यों न बीत जाए,
इंतज़ार करते हुए उनकी भक्ति की खातिर,
वो उन्हें दर्शन देने एक दिन जरूर आएंगे।
आस्था मनुष्य को सही मार्ग दिखाती है,
भगवान के प्रति उसके प्यार को दर्शाती है,
कितने भी दुख क्यों न बढ जाए जीवन में,
पर उसकी आस्था उसे हर मुसीबत से पार कराती है।
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