Custom Pages
[vc_separator type='transparent' color='' thickness='' up='20' down='7']
Portfolio
[vc_separator type='transparent' color='' thickness='' up='20' down='7'] [vc_separator type="transparent" position="center" up="12" down="16"]

कर बर्दाश्त क्यूँकि.. लड़का है तू

Share on facebook
Share on twitter
Share on whatsapp
हुआ पैदा जिस दिन घर में
त्योहार मना माँ-बाप के आँगन में,
ताँता लगा रहा सबकी बधाइयों का
के हुआ आगमन कुल-भूषण का।
कहा सबने बहुत भाग्यवान है परिवार
जनम हुआ है लड़के का इस बार,
सबको सम्बल देगा यह अब
चाहे कितने ही दुखों का हो अम्बार।
होने लगा जब बड़ा वो बच्चा
मची मन में उसके भी लालसा,
ना हुई जब उसकी पुरी इच्छा
रोने लगा वो छोटा सा बच्चा।
लगे जब ढुलकने आँसू उसके
कहा माता-पिता ने उसके,
ऐसे क्यूँ रोता है भला
कर बर्दाश्त क्यूँकि.. लड़का है तू।
सम्भाला जब होश उसने
सपने देखने लगा वो अपने मन में,
भींग गयी आँखें उसकी
जब उड़ ना पाया अपने खुले मन से।
लेकिन सम्भाला खुद को यह सोच कर के
कर बर्दाश्त क्यूँकि.. लड़का है तू।

हुआ उसके मन भी एक मीठा सा एहसास
झूमने लगे हो जैसे उसके धरती और आकाश,
पड़ गया पहले प्यार में वो लड़का
जब पहली बार किसी के लिए दिल उसका धड़का।
किया इकरार उसने अपनी मोहब्बत का जब,
तोड़ा दिया दिल उसका बेहिसाब उस बेवफ़ा ने जब,
रोया था बहुत ज़ोरों से उस रात को,
ना रहा विश्वास और हिम्मत फिर किसी के ऐतबार को,
लेकिन सम्भाला खुद को यह सोच कर के
कर बर्दाश्त क्यूँकि.. लड़का है तू।
खड़ी करी जब उसने खुद की गृहस्ती
पीछे रह गयी जवानी की सब मौज-मस्ती,
बढ़ गया अब बोझ ज़िम्मेदारी का उसपर
करने लगा सबके सपने पूरे खुद जल जल कर।
होता था जब झगड़ा बीवी से कई बार
ना सूनते थे बच्चे उसका कहा कई बार,
माँ-बाप की ज़िम्मेदारी भी थी कई हज़ार
पुरानी हसीन यादें ले आती थी आँसु हर बार।
लेकिन सम्भाला खुद को यह सोच कर के
कर बर्दाश्त क्यूँकि.. लड़का है तू।

आया जब बुढ़ापा सर पे
ना पूरे हुए कई अरमान दिल के,
किया पीछा जिन सपनों का उम्र भर
जिनके पीछे ना जिया तनिक भर।
अब सोच रहे उन बीते दिनों को
बहुत दुर छोड़ दिया अपनों को,
साथी बना लिया अपने अकेलेपन को
अब तो आँसूँ भी सूख गए बरसन को।
लेकिन सम्भाला खुद को यह सोच कर के
अब क्यूँ करूँ बर्दाश्त.. जीवन अब जी लिया तू।
0

Note : Please Login to use like button

Share this post with your friends

Share on facebook
Share on twitter
Share on whatsapp
Share on email
No Comments

Post A Comment

Related Posts

Hindi
Yogesh V Nayyar

मयखाना

मयखाने के दरवाज़े खुलते हैं अंदर की ओर, हर आने वाला अपनी रूबाई सुनाता है। कुछ गम के साए में मजबूर, कुछ अपनी तन्हाइयों से दूर। हर प्याले में होता है जाम, अपने हरषु के लिए बेताब, किसी का गम गलत करने को, तो किसी

Read More »
Hindi
Yogesh V Nayyar

दामन

सच कहा है के अंधेरे में परछाईं भी साथ छोड़ जाती है, जब मौत आती है ज़िंदगी साथ छोड़ जाती है, मगर हम तो उन में से हैं जो न छोड़ते हैं साथ, चाहे हो परछाई या हो मौत का हाथ। थामते हैं दामन जब

Read More »
Hindi
Nilofar Farooqui Tauseef

यात्रा की यादें

हसीन यादों का हसीन सफर।श्याम की नगरी, मथुरा डगर। मन हतोत्साहित, चेहरे पे मुस्कान।मन बनाये नए-नए पकवान। मंदिरों से आती, घण्टों की आवाज़।श्याम की बाँसुरी संग छेड़े साज़। बस का था सफर, मन विचलित।नयन तरसे, होकर प्रफुल्लित। स्वर्ग सैर हुआ मन को।उसी पल कैद किया

Read More »
Article
Shreya Saha

पिता दिवस

जिस प्रकार माँ जीवन प्रदान करती हैं, ठीक उसी प्रकार पिता जीवन को सही दिशा दिखता है। पिता का दिल बाहर से कठोर हो सकता है, लेकिन अंदर से वो नारियल के सामान नरम होता है। पिता अपना प्यार दिखा नहीं पाते, लेकिन संतान पर

Read More »