Custom Pages
[vc_separator type='transparent' color='' thickness='' up='20' down='7']
Portfolio
[vc_separator type='transparent' color='' thickness='' up='20' down='7'] [vc_separator type="transparent" position="center" up="12" down="16"]
 

शिक्षक

शिक्षक

क्यों गुरुओं का आदर हम करना भूल गए हैं?
एक्लव्य की गुरु भक्ति हम क्या जाने, हम एक्लव्य कौन थे यह भी जानते तक नही हैं,
इतना आधुनकि होने का क्या फायदा?
जब गुरुओं के लिए सम्मान ही नही है।
अंगूठा काट कर गुरुदक्षिणा में दे दिया एक्लव्य ने,
और हम गुरुदक्षिणा के नाम पर बस गुरुओं का अपमान ही करते हैं,
पैरों को छूने की तो दूर की बात,
हम उन्हें प्रणाम करने से भी हिचकते हैं।
'गुरु गोबिंद दो खड़े, काके लागू पाये
बलिहारी गुरु आपने,जिन गोबिंद दियो बताये',
कबीर का यह दोहा अब बस दोहा ही क्यों रह गया है?
हम इसे जीवन मे अपनाते क्यों नही हैं?
गुरु की शिक्षा बिन कोई आगे बढ़ नही सकता,
गुरुओं का मज़ाक उड़ा कर कोई मंज़िल हासिल कर नही सकता,
गुरुओं का सम्मान करो,
आदर और सत्कार करो।
No Comments

Post A Comment