Custom Pages
[vc_separator type='transparent' color='' thickness='' up='20' down='7']
Portfolio
[vc_separator type='transparent' color='' thickness='' up='20' down='7'] [vc_separator type="transparent" position="center" up="12" down="16"]
 

मैं

मैं

प्रिय आशिमा (मैं)
तुमने अपनी जिंदगी में बहुत कुछ सहा है,
अब सब सहना छोड दो,
अपने लिए तुमने कभी कुछ नहीं किया है,
कभी खुद के लिए कुछ करो,
हमेशा दूसरो के लिए सोचा,
कभी खुद के लिए भी अच्छा सोचो,
हमेशा दूसरो के लिए वक्त निकाला,
कभी खुद के लिए वक्त निकाला करो,
और लोगो की नजरो मे अच्छे बनने के लिए,
अपनी नज़रो में अपनी पहचान खो रहीं,
तुम इस दुनिया के हिसाब से बहुत चल दी,
कभी खुद के हिसाब से भी चलना सीखो,
नज़रे उठाकर सबसे बात करती हो,
कभी खुद से भी नज़र मिलाया करो,
तुम हमेशा दूसरे के कहे रास्तो पर चलती हो,
कभी खुद का अलग रास्ता भी बनाकर देखो,
हमेशा दूसरो का हाल चाल पूछती हो,
कभी खुद का हाल भी पूछा करो,
खुश हो जाती हो और लोगो के चेहरे की रोशनी को देखकर,
कभी खुद के अंदर का अंधेरा तो मिटा,
आज तक सबके लिए लडी हो,
कभी खुद के लिए भी लडा करो,
हमेशा बिना गल्ती के इलजाम सहती आयी हो, अब उन इलजामो को सहना बंद कर दो,
कोई गल्त बात कहे उसकी बात पर रोने बैठ जाती हो,
बहुत रो चुकी, अब खुद को कभी रोने मत दो।
No Comments

Post A Comment