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शिक्षा आधार-शिक्षक दिवस

शिक्षा आधार-शिक्षक दिवस

बिन गुरु ज्ञान नहीं, मान नहीं सम्मान नहीं,
जीवन की चर्कव्युह में, कोई भी निदान नहीं।
माटी के पुतले हम, गुरु ने आकार दिया,
हर शैली में ढाल कर, हमपे है उपकार किया।
माँ ने दिया जन्म, पिता ने किया परोपकार,
सुलभ ज्ञान देकर, गुरु ने सिखाया संस्कार।
लेखनी पकड़ाकर हाथों में, सत्य की राह दिखाई,
टूट के जो बिखरे, वीर गाथा हमें सुनाई।
देश हित के कर्तव्य का अनूठा पाठ हमें पढ़ाया,
अंधकारमय जीवन में, दीप ज्योत जलाया।
गुरु द्रोणाचार्य की मूरत बिन, एकलव्य भी अधूरा था,
आशा की किरण थे गुरु, तभी तो निशाना पूरा था।
क्षेत्र हो या कुरुक्षेत्र, गुरु ही दिव्य शक्ति है,
मन है पावन और ह्रदय में भक्ति है,
मन है पावन और ह्रदय में भक्ति है।
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