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शिक्षक

शिक्षक

है शिक्षक बनने का काम बड़ा,
न रुपये पैसो की ये बाते है।
बच्चो की सिखों के खातिर ,
अपनी जाने छोड़कर आते हैं।
अहंकार को कर दरकिनार,
हमे बार बार सिखलाते हैं।
पन्नो का सीमित ज्ञान नहीं,
जीवन विस्तार कराते हैं।
करते रहते सख्त प्रयोग,
नई तकनीको से बतलाते हैं।
होते खड़े बच्चों के लिए,
न शिकायत भी कर पाते हैं।
गलती होती बच्चों की पर,
ढाल बने वो आते हैं।
शिक्षकपन को चुनना भी,
आत्मदाह सा घातक है।
यही शख्स ही है जीवन मे,
जो अपने रण का चेतक है।
है इसके ही कारण हम सब,
कर्मो में भी अपने रंगत है।
कीमत चुका नही सकते हम,
मूल्य जो इसकी लागत है।
पैशन वाले शिक्षक होना,
बड़े भाग्य की बाते है।
उनके जितना कर्मयोग,
कहाँ कोई कर पाते हैं।
होती शान की ही बात,
जो गौरव मिलवाते हैं।
एक ही दिन मैं क्या सौपु,
हर दिन के ही अधिकारी हैं।
एक एक जन मानस हम सब,
हर शिक्षक के आभारी हैं।।
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