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सूरज छुपा है,पर ढला तो नही

सूरज छुपा है,पर ढला तो नही

कुछ पल के लिए ठहरा हूँ, पर मेरा सफर रुका तो नहीं,
मुश्किले है बहुत सफर में, मगर मुश्किलों से डरा तो नहीं,
कुछ पलो के लिए थम गया हूँ, मंज़िल से भटका तो नहीं,
माना मैंने अभी सूरज छुपा है, पर ढला तो नहीं।
ठोकरे बहुत सी मिली, पर मैं आगे बढ़ने से रुका तो नहीं,
लोग क्या कहेंगे मुझे, इस उपहास से वापिस मुड़ा तो नहीं,
मंज़िल दूर है बहुत अभी, इस डर से मैं थका तो नहीं,
माना मैंने अभी सूरज छुपा है, पर ढला तो नही।
अपनो का साथ नही मेरे, अकेले चलने से रुका तो नहीं,
लोगो ने कहा मत कर, इस फैसले से मैं पीछे हटा तो नहीं,
बात न मानकर पछतायेगा, उस डर से मैं रुका तो नहीं
माना मैंने अभी सूरज छुपा है, पर ढला तो नहीं।
उजालो में निकला था, अंधेरे के डर से वापिस लौटा तो नहीं,
फूलो से काँटे चुभे बहुत, पर उस चुबन से मैं रोया तो नहीं,
निराशाएं हुई मुझे सफर में, मैं पथ पर चलने से रुका तो नहीं,
माना मैंने अभी सूरज छुपा है, पर ढला तो नहीं।
कंही खो न जाऊँ अकेले, इस डर से मंज़र पर रुका तो नहीं,
अकेला चलना है सफर में, अकेलेपन से मैं डरा तो नहीं,
मंज़िल नहीं दिख रही, इस डर से मैंने रास्ता बदला तो नहीं,
माना मैंने अभी सूरज छुपा है, पर ढला तो नहीं।
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