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वो जिसने मुझे…तराश कर निखारा है!

वो जिसने मुझे…तराश कर निखारा है!

वो जिसने मुझे,
तराश कर निखारा है,
मेरी लड़खड़ाती जिंदगी का,
बस वहीं तो सहारा है,
शुरुवात एक जुमले से हुई थी,
पर आज अलग ही नज़ारा हैं,
जैसा भी है.. जो भी है,
वो हमारे लिए सबसे प्यारा हैं।
मैं जो भी ख़्वाब देखता हूँ,
वो उसे अपना मानती है,
चाहे अलग क्यू ना हो ख़्वाब मेरे,
पर मेरे लिए वो भी ख़्वाब बुनती है,
मेरे समुंदर जैसे दिल में,
वो जहाज़ बनकर उतर जाती है,
कभी परेशानियां तुफ़ान बनकर आए तो,
वो कश्ती़ किनारे तक़ ले आतीं हैं‌।
हमारी जिंदगी एक ही है,
पर वो किरदार कई सारे निभातीं है,
कभी खुशियों के आसूं से,
बेशुमार हंसाती है,
जानबुझकर में गलती करु तो,
काऩ पकड़कर मुझे समझाती है,
और जब भी मरहम़ बनने का वक्त आए,
तो दुआ बनकर दवा़ का असर कर जाती हैं‌।
इतना कुछ होकर भी,
मेरी मोहब्बत मुझसे दूर कैसे रह‌ पातीं है?
और यह बातें भी उसे बतांनी नहीं होती,
शायद हालातों की दूरीओं से रह जाती हैं।
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