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माँ

माँ

माँ
मुस्कुराते चेहरे के पीछे का
हर दर्द पहचान लेती है,
मेरी हर छोटी-बड़ी खुशियों की हर
वजह जान लेती है,
मेरी ख़ामोशी को भी
बड़े आसानी पढ़ लेती है,
बीना बोले ही 
मेरी हर बात समझ लेती है,
हैं मुझमें चाहे लाख कमियाँ
जमाने की नज़र में,
पर,
"माँ मेरी मुझे बखूबी परख लेती है।
भगवान से मांगने पर भी
कभी कभी
कुछ मिन्नतें रह जातीं हैं अधूरी,
पर,
माँ से जब जब माँगा है मैंने,
सारी ख्वाहिशें हर हाल में
माँ कर देती हैं पूरी।
अपनी ममता और निस्वार्थ प्रेम
हर पल मुझपर लुटाती हैं।
जीवन की परिस्थिति के अनुसार
सखी सहेली शिक्षिका डॉक्टर,
माँ मेरी मेरे लिए
सब कुछ बन जाती हैं।

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