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ख्वाबो की दुनिया

ख्वाबो की दुनिया

जो दिन भर हम करने की सोचते हैं।
अक्सर उसी के सपने हम बुना करते हैं।
जब कभी थक जाते हैं लड़ते लड़ते फिर।
ख्वाबो की दुनिया हम संजोया करते हैं।
कामयाबी की ऊँचाई हम खुद तय करते हैं।
हर हार को जीत में तब्दील कर सकते हैं।
जब कभी हार दिखाई देती है हमे फिर।
ख्वाबो की दुनिया हम संजोया करते हैं।
हमारी मंज़िल को हम खुद चुनते हैं।
कभी हम दिन रात बस उसी को पूरा करने में लगते हैं।
जब कभी भटक जाते हैं मंज़िल से फिर।
ख्वाबो की दुनिया हम संजोया करते हैं।
सपनो को पूरा करने में हम लगे रहते हैं।
हारकर भी जितने की सोचते रहते हैं।
जब कभी मनोबल कम होने लगता हैं।
ख्वाबो की दुनिया हम संजोया करते हैं।

हमारा चुनाव हमारा भविष्य तय करता है।
हमारे कदमो को मंज़िल की और बढ़ाता है।
जब कभी रुक जाते हैं हमारे कदम फिर।
ख्वाबो की दुनिया हम संजोया करते हैं।

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