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अहमियत को अब कहने की जरूरत हैं क्याँ?

अहमियत को अब कहने की जरूरत हैं क्याँ?

चहु और भला आज यह क्रंदन क्यूँ,
माँ हिंदी के लिए यह चिंतन क्यूँ?
समाप्त की जा सकती नहीं माँ की महिमा,
तो जतन करने का फिर ये निवेदन क्यूँ?
महत्व समझाने की आज जरूरत क्यूँ,
मातृभाषा के प्रति आंदोलन क्यूँ?
भला-बुरा कहना किसी अन्य भाषा के प्रति,
तो फिर हिंदी को बचाने का झूठा दिखावा क्यूँ?
मातृभाषा के ही संस्कारों का विस्मरण क्यूँ,
सम्मान सबका हों यह बात माँ हिंदी की हम भूले क्यूँ?
प्रेम जताने के लिए बस एक दिन क्यूँ,
हिंदी दिवस के लिए सिर्फ 14 सितंबर क्यूँ?
जननी झोली पसारे संतान के समक्ष,
शोभा देता है क्याँ?
मिटाया जा सकता नहीं माँ का वजूद,
कोई मिटा सकता है क्याँ?
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