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ख्वाबों के गुल्लक

ख्वाबों के गुल्लक

ख्वाबों के गुल्लक में खुशियाँ हजार थी,
हर हाल में थी मेरी जीत कहीं पर भी न हार थी।
संजोए सपने कई गुल्लक में पैसों की तरह,
ख्वाबों के गुल्लक में भी खुशियों की भरमार थी।
जीता गया जिन्दगी अपनी और खर्च होते गए ख्वाब,
कुछ हुए पूरे और कुछ रहे अधूरे मेरे ख्वाब।
हमेशा सम्भाल कर नहीं रख सकता था मैं इनको अपने पास,
उम्र के साथ ढलते गए ख्वाबों के गुल्लक के ख्वाब।
यहाँ तकाजा सिर्फ वक्त का है सपनों का नहीं,
सारे ख्वाब पूरे हो जाएं यहाँ ये भी जरूरी नहीं।
टूटते है जब ख्वाब तो ख्वाबों की गुल्लक में रह जाते हैं,
कुछ ख्वाब होते हैं ऐसे जो समय के साथ पूरे हो पाते हैं नहीं।
कुछ ख्वाबों पर हमारा बस नहीं चलता है,
कुछ ख्वाब चलते हैं समय के साथ।
मिलता है हमे जब भी कोई मौका हम उसे पूरा करने का देखता है ख्वाब,
सही समय पर मिल जाए तो पूरा नहीं तो बहुत से अधूरे रह जाते हैं ख्वाब।
ख्वाबों को गुल्लक में रखना जरूरी नहीं इन्हे अपना बनाना जरूरी है,
पूरे कर सकते हैं हम अपने सारे ख्वाब नहीं टिक सकती हमारे सामने कोई मजबूरी है।
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