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मधु

मधु

मधु की एक तार,
मानो अमृत की धार।
स्फूर्ति दे यह ऐसे,
मानो अपनों का प्यार।
बेस्वाद काढ़े में भी,
यह भर दे मिठास।
कटु रिश्तों में जैसे,
हो प्यार का एहसास।
शक्ति का है यह आधार,
स्वाद में लगाए चांद चार।
रंग बिरंगे फूलों के,
रस का है यह आगार।
गुणकारी इतना कि,
कई रोगों को भगाए दूर।
उन्मुक्ति बढ़ाए व
चेहरे पर लाए नया नूर।
यह तो देन है प्रकृति की,
यह मेहनत है एक छोटी सी मधुमक्खी की।
ना जाने कितने फूलों का करके रसपान,
बनाती है मधु-मिठास की खान।
कुदरत का भी प्रकट करना चाहिए आधार,
जिसने दी हमें दी, अमृत तुल्य मधु की धार।
जिसने हमें बख़्शी, अमृत तुल्य मधु की धार।।
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