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मासूम का सपना

मासूम का सपना

मेरे संग आज नहीं बस्ता,
गरीब का सपना हैं इतना सस्ता।
क्यूँ बाल - मजदूरी हैं नसीब,
शिक्षा के क्यूँ नहीं हूँ करीब।
मेरा भी है प्यारा बचपन,
फर्ज क्यूँ हैं जैंसे हो पचपन।
मुझे भी आते हैं ख्वाब,
जिसमें दिखता हूँ शिक्षित नवाब।
गरीब होना है कोई खता,
मेरी प्यारी-प्यारी माँ बता।
आज भी मरता है बाल मजदूर,
मासूम चंद सिक्कों से होता मजबूर।
बर्तन सांफ करे जब छोटे से हाथ,
कोई कानून नहीं देता इनका साथ।
क्यूँ भूलतें हो पराया भी बच्चा है,
मन का वो मासूम सच्चा है।
मासूमों को जो तुमने दिया हाथ,
रब सबसें पहले देगा तुम्हारा साथ।
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