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वो एक लड़का

वो एक लड़का

वो एक दिन एक लड़के से मेरी दोस्ती हुई,
बातों ही बातों में वो दोस्ती और गहरी होती चली गयी,
और ना जाने वो दोस्ती कब प्यार में बदल गयी।
वो रात रात तक उससे दिल खोलके बातें करना,
और सुबह जल्दी उठ ना पाना,
वो कभी कभी बातों बातों में मेरा रूठ जाना फिर उसका मेरे घर के बाहर आकर मुझे मनाना,
और मेरा झट से मान जाना,
शायद यही वो प्यार था।
उसका ग़लत बात पर मुझे डाँटना,
और ना पढ़ने पर मुझे ख़ूब सुनाना,
मेरे सपनो को अपने सपने बताना,
और जब मैं भटक जाऊँ तो मुझे सही राह पर लाना,
शायद यही वो प्यार था।
मेरे रोने पर उसका हँसना,
और मुझे ख़ूब तंग करना,
मुझे आत्मनिर्भर बनाना,
और मेरे पीछे दीवार की तरह डट कर खड़े रहना,
मुझे ख़ुद की मुसीबतों का सामना ख़ुद करना सिखाना,
शायद यही वो प्यार था>
प्यार था या पता नही क्या था, पर जो भी था वही मेरी ताक़त बना और मुझे मेरी मंज़िल तक लेकर चला,
हमेशा मेरी रूह बन मेरे साथ चलता गया, चलता गया,
और मेरे सभी सपनो को पूरा करता गया, करता गया।
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