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डर के आगे जीत

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वक्त दे रहा पुकार तुम्हें,
अवसर दे रहा दुहाई तुम्हें।
क्यूँ भाग रहे दूर इस से,
डर तुम्हें है किस से।

ना रहे डर तुम्हारे अंदर,
फ़तह कर सबसे ऊँचा शिख़र।
क्यूँ चाहते हो बर्बाद होना,
बंद करो डर का रोना धोना।

मान सिकंदर ख़ुद को तू,
कर आत्मसात सच को तू।
प्रबुद्ध है शाश्वत ज्ञान यही,
बहादुरी का कोई तोड़ नहीं।

हो कठीन कितनी भी राह,
प्रबल रहे जीत की चाह।
कोशिश रहे सच्ची तेरी,
हो कितनी भी राह अंधेरी।

डर के आगे झुकना क्यूँ,
चलते राह थकना क्यूँ।
मंज़िल मिलेगी या नहीं तुझे,
यह सोच सोच कर मरना क्यूँ।

ग़र करना हो अपना नाम अमर,
डर से लड़ कुछ बड़ा कर गुज़र।
मेहनत में ना रहे कमी कोई,
सलाम करेगा तुझे हर कोई।

ले एक सुर जीत का मन में,
चलता चल तूफ़ानी भँवर में।
धन्य होगा जीवन तेरा जग में,
डर भी झुकेगा तेरे कदमों में।

संघर्ष हो कितना भी घनघोर,
हो तिमिर भले तेरे चहुं और।
हो रक्तरंजीत भले आस्मां,
चट्टान सा हो तेरा जज़्बा।

मनुष्य है वही सफल जीवन में ,
किया संघर्ष अविरल राह में
जो थक कर मान बैठा हार,
होता हर जगह उसका तिरस्कार।

जुनून एक रख सवार ख़ुद में,
आगे बढ़ते जा समृद्धि पथ में।
एक कर दे ज़मीन और आस्मां,
छोड़ जग में अपने कदमों के निशान।

मनुष्य सच्चा वही जग में,
जान लिया ज्ञान यह जिसने
प्रथम रख संकल्प यही स्वयं का,
हो जज़्बा डर से आगे जीत का।

ग़र हो गर्दिश में तेरे तारे,
हार ना मानना कभी प्यारे।
आएगा समय तेरी जीत का,
पकड़े रहना धागा उम्मीद का।

ग़र पाना है फल तुझे जीत का,
करते रहना होगा सच्चा प्रयास।
जीतता वही है जीवन में हर पग पर,
जिसने किया हो निरंतर अभ्यास।

जीवन में आती तब ख़ुशहाली,
होगा तू भी जग में समृधशाली।
बस रख मन में रहे मंत्र यही,
के डर के आगे जीत है तेरी।
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2 Comments
  • Nidhi
    Posted at 14:06h, 26 September Reply

    Too good

  • Richa
    Posted at 18:35h, 26 September Reply

    Motivational

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