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जिंदगी रहस्य है

जिंदगी रहस्य है

तुझे समझते-समझते ऐ जिंदगी,
हैरान हूँ मैं, क्या कहूँ कितनी परेशान हूँ मैं।
यूँ तो सिखाया तूने मुझे,
हर बार गिर कर चलना,
फिर भी रहस्य है, तू मेरे लिए।
यूँ तो दे जाती है तू,
हर बार एक नयी सीख मुझे,
फिर भी अनजान हूँ, मैं तुझसे अभी।
हर बार नए रंग दिखाती है,
टूट जाऊँ अगर मैं खुद से,
मुझे मुझसे फिर से मिलाती है,
रुलाते-रुलाते तू मुझे,
खुश रहने की कोई वजह दे जाती है,
मेरे चेहरे पर रोज नए फूल खिलाती है।
हाँ जी तो लिया तुझे कितने साल,
पर अब भी तू मेरे लिए रहस्य बन जाती है।।
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