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हे मनुष्य तुझे क्या हो गया

हे मनुष्य तुझे क्या हो गया

हे मनुष्य तुझे क्या हो गया,
क्यूं तू जग के मोह जाल में इतना खो गया,
औरों को समझे तू तुच्छ,
खुद में क्यूं तू इतना बड़ा हो गया।
हे मनुष्य तुझे क्या हो गया,
लिए बैठा है, इतनी कड़वाहट मन में,
करता क्यूं है, तू खुद पे इतना घमंड
किस बात का तुझे अहंकार हो गया।
हे मनुष्य तुझे क्या हो गया,
औरों के लिए भावना है, तेरी ऐसी,
जैसे तू खुद भगवान हो गया,
सबका नाश यहीं लिखा है,
फिर कैसे तू इतना महान हो गया।
हे मनुष्य तुझे क्या हो गया,
हर तरफ है विपदा छाई,
फिर भी क्यूं तू अनभिज्ञ हो गया।।
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