Custom Pages
[vc_separator type='transparent' color='' thickness='' up='20' down='7']
Portfolio
[vc_separator type='transparent' color='' thickness='' up='20' down='7'] [vc_separator type="transparent" position="center" up="12" down="16"]
 

बचपन हमारा, पापा का सहारा

बचपन हमारा, पापा का सहारा

बचपन बेशक़ हो अपना, एहसास होते हैं पापा के,
चाहत बेशक़ हो अपनी, वो ख़्वाब बनते हैं पापा के,
माँ का ज़िक्र तो सब करते हैं, बचपन के एहसासों में,
पापा के प्यार को मैं बयाँ करुँ, अपने कुछ अल्फ़ाज़ों में।

एक पहल क्या मैं करुँ, और ये बतलाऊँ,
कि पापा ने कितने सब्र के घूँट पिए, हमारे बेबुनियाद सवालों में,
पापा का प्यार बसे, बचपन के हर ख़्वाबों व ख्यालों में।

वो पल बहुत ख़ास हुआ होगा,
जब गोद में नन्हीं सी गुड़िया का एहसास हुआ होगा,
दिल के जज़्बात आँखों की चमक बन उमड़ आए होंगे,
कैसे मेरे पापा उनको सम्भाल पाए होंगे।
इक पल में जैसे हज़ारों सपने संजोए होंगे,
मेरी बेटी, मेरी लाडो, कहकर कितने ही आसूँ ख़ुशियों के पिरोये होंगे।

नन्हे-नन्हे पग में हमारे, फूलों की एक राह बनाते,
हमें सुलाकर मखमल पर, खुद काटों की शैय्या ही पाते,
हमारे बचपन में ही वो अपना बचपन यूँ जी जाते,
हमें मानकर गुड्डा-गुड़िया नए-नए से लाड लड़ाते।

जीते हैं वो बचपन अपना,
हमारी नादानिओं और शैतानिओं में,
पढ़ते है वो कहानी अपनी, हमारी रंगीन किताबों में,
बह जाते है वो फ़िर अपने बचपन के सैलाबों में।

मासूम से पापा मेरे, बच्चों का सा रखते दिल,
ज़रा सी आँच जो आये मुझपर, दिल उनका यूँ जाता हिल,
चाहत उनकी बस इतनी, अपने सपनों से मैं जाऊँ मिल,
दिन रात कर देते एक, पैसे बचाते वो तिल तिल।

बचपन के एहसासों को लेकर संग,
आज मैं भरदू पापा के सपनो में वो सारे रंग,
नाज़ करें वो मुझपर ऐसे,
आँखें उनकी फिर चमके बन हीरा जैसे।
19 Comments
  • Anubha Agarwal
    Posted at 19:37h, 07 October Reply

    very beautiful poem ❤❤

  • Anubha Agarwal
    Posted at 19:39h, 07 October Reply

    Papa ka saccha pyar

  • Kiran
    Posted at 20:55h, 07 October Reply

    👌👌

  • Dimpy
    Posted at 22:56h, 07 October Reply

    I really don’t have words to say something about this poem😍😍

  • Amit jangir
    Posted at 23:53h, 07 October Reply

    👍👍👍👌

  • Sampada Sharma
    Posted at 01:00h, 08 October Reply

    An extremely well written piece 👌

  • Shivali
    Posted at 08:23h, 08 October Reply

    A beautiful and very well worded poem. 💜💜

  • Pritam Kaushik
    Posted at 08:28h, 08 October Reply

    Nice one👍👍👍

  • Vandana
    Posted at 11:01h, 08 October Reply

    🤗🤗🤗

  • Mukul
    Posted at 11:01h, 08 October Reply

    Wow🤩🤩

  • Shivom
    Posted at 11:02h, 08 October Reply

    Amazing 😍😍

  • Annapurna Bhardwaj
    Posted at 14:34h, 08 October Reply

    To good 😀🐭

  • Annapurna Bhardwaj
    Posted at 14:35h, 08 October Reply

    👍👍👌👌👌👌

  • Kartik
    Posted at 15:27h, 08 October Reply

    Meko to maa hi pyaari he😍😍

  • Suraj
    Posted at 15:29h, 08 October Reply

    Mere papa to mko bahut pareshan krte he🤣🤣🤣

  • Sonali
    Posted at 15:32h, 08 October Reply

    Papa ke liye to hum pario se km nhi ❤❤❤💖

  • Nidhi Mittal
    Posted at 20:18h, 08 October Reply

    Nice👏

  • Jatin Arora
    Posted at 23:34h, 09 October Reply

    👌👌👌

  • Naveen
    Posted at 06:09h, 10 October Reply

    Papa, the man, the myth, the legend…👌👌👌

Post A Comment