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लकड़ी ले ली पेड़ खत्म हो गए।
पानी दूषित है।
हवा प्रदूषित है।
साँस ढंग से ले नहीं सकते।
ऐसा क्यूँ हुआ है?
जवाब इसका दे नहीं सकते।
भूखे को मिलती रोटी नहीं है।
अमीर की ख्वाहिश पूरी कभी होती नहीं है।
लड़कियों को पढ़ाना नहीं है।
सबको नीचे खींचना है।
आगे किसी को बढ़ाना नहीं है।
झूठे इलज़ाम खूब चलते हैं।
सच्चे लोग पहले मरते हैं।
नौकरी मिलती नहीं है।
डिग्री टिकती नहीं है।
ज़िंदगी की गांरटी नहीं है।
मुजरिम देखो हर कहीं है।
पेड़ काटकर जो कागज़ बनता है,
उसपे लिखते हैं पेड़ बचाओ।
माँस खाकर कहते हैं,
चलो आज शाकाहारी बन जाओ।
पिज़्ज़ा पहुँचेगा,
एम्बुलेंस से पहले।
कोई मदद नहीं करेगा,
जो कहना है कहले।
रिश्तों में काफी दूरी है,
पैसा उनसे ज़्यादा ज़रूरी है।
यहाँ कोई किसी का नहीं है,
सबको पहले अपनी पड़ी है।
झूठे के लिए इनाम है,
सच्चे के लिए गाली है।
करोड़पति का पेट साथ पुश्तों तक भरा है,
खाली तो झोपड़ी वाली थाली है।
भ्रष्टाचार का पेड़ भी फल-फूल रहा है,
पैसे देकर पहले काम करवाने का उसूल रहा है।
सामने हो तो हाँ में हाँ मिला ही देंगे,
पीठ पीछे कोई जाल भी बना ही देंगे।
मोहब्बत की बातें सब कर लेंगे,
पर नफरत भी है सबको किसी ना किसी से।
फूल तो लोग दिखाने के लिए देते हैं,
देना तो काँटा चाहते हैं।
ऊपर से शाबाशी देते हैं,
अन्दर जलन बढ़ रही होती है।
दिल से तो फिर भी कोई कोई अच्छा होता है,
दिमाग का तो फिर पता नहीं उसमें क्या चल रहा होता है।
मज़ाक उडाना सबको आता है,
सहना नहीं सीखा किसी ने।
भरोसा करो जिस पर,
धोखा भी दिया है उसी ने।
बाहर से दोस्त बनते हैं,
अन्दर से दुश्मनी का बीज भी बोते हैं।
बुरा मत मानना, कहकर बात वही बोलनी होती है,
जिससे सामने वाले को बुरा लगे।
करेंगे तो सब बुरा,
करने के लिये कहेंगे अच्छा।
बनाना चाहते हैं सबको,
डॉक्टर,इंजीनियर या लॉयर
नहीं बनते हुए देखना चाहते
पेंटर,सिंगर या ऐक्टर अपना बच्चा।
अफवाहों को यहाँ हर कोई मानता है,
किसी से बहस नहीं करनी
क्या पता वो कह दे
ओ मेरे बाप को जानता है?
राजनीती की चालें भी बड़ी खतरनाक हैं
बचोगे कैसे,
वही बिच्छू है वही साँप है।
नौ दिन जिसकी पूजा करेंगे,
फिर जलाएंगे भी उसी को।
बेटी-बचाओ बेटी पढ़ाओ की जगह,
बेटों को समझाओ
कोई नहीं बोलेगा किसी को।
आम आदमी को क्या बचाएं,
पुलिस वाले खुद घायल हो जाते हैं।
कैसा प्यार करते हैं कुछ लोग,
बिल्कुल पागल हो जाते हैं।
टाँग खींचने वाले हर जगह हैं,
बचाने वाला कोई मिलता नहीं।
कोई जख्मी हो सड़क पे,
खड़े रहकर तमाशा देखते हैं तब सारे
उस वक़्त कोई हिलता नहीं।
ऊपर बैठे हुए बन्दों से,
हमेशा नीचे वाला डरेगा।
कुछ ना किया तो कहेंगे बोझ है तू,
कुछ कमाल कर दिया तो कहेंगे
हमें तो पता था तू ऐसा करेगा।
सच्ची बात का होता है विरोध,
झूठी बात पर रहते हैं मौन।
काम निकलवाने के लिए आते हैं सब
फिर कहते हैं,
तू कौन ?
मैं कौन ?
कहते हैं लोग बेटी पराया धन है,
ससुराल वालों को बताओ की जब बेटी धन है,
तो इसके साथ और धन की माँग क्यूँ करते हो।
धन के साथ धन थोड़ी ना जाएगा।
इस दौर को इंसानों को बदलना पड़ेगा,
जितना जल्दी हो सके हमें संभालना पड़ेगा।
वरना दुनिया तो इंसानों के बिना भी चली थी पहले,
इन्सान ना रहे ये तो तब भी चलेगी।
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