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एक भावनात्मक जीव

एक भावनात्मक जीव

जो जितना निकट होवे
वो उतना ही रुलावे हो।
जो अपना होवे, वो ही
विषैले शब्द उगलावे हो।
प्रेम हर कोई अंदर दबावे,
वैर नही छिपावे हो।
यारो संग हर वक़्त खड़े रहते,
बुरी घड़ी, अकेले रह जावे हो।
दूसरो को बहुत समझते,
खुद अंदर ही उलझते हो।
अपनों के आसूं पोछने वाले,
अपनी धारा न रोकपाते हो।
लोगो को पलपल हसाते रहते,
खुद को खुश न रखपाते हो।
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