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एक खास तोहफा

एक खास तोहफा

एक खास तोहफा हो तुम,
जीतना भी समय बिताओ,
मन ना भरे इतने प्यारे हो तुम।

सब कहते हैं कि जानवर बोल नही सकते,
पर बोलते इंसान जो समझ नहीं सकते,
वो पीडा आँखों से पहचान लेते हो तुम।

जब गुस्से मे लोग भड़कते हैं तुम पे,
फिर भी तुम दूर नहीं जाते इनसे,
इतने अनमोल हो तुम।

एक बार प्यार जतादो तो,
जिंदगी भर नहीं भूलते तुम।
पर इंसान तो मतलबी है मेरे दोस्त,
इनपे क्यो जान न्योछावर करते हो तुम।

वफादारी मे सबसे पहला स्थान तुम्हारा है,
जान से खेल कर इनकी रक्षा करते हो तुम,
अंत में लोगों के स्वार्थ का शिकार होते हो तुम।

चाहे रेस दौडना हो, या बोझ उठवाना हो,
इन्हे सबसे पहले ख्याल आता है तुम्हारा।
पर जब इंसान गलती करता है,
तो सुनते हैं गालियाँ नाम से तुम्हारे?

इतने बेरहम क्यो है ये इंसान तुम पे?
वैक्सीन से लेकर दवाईयों तक,
सारे प्रयत्न पहले तुम पे।

रोता हुआ डौगी गिडगिडाया आपने मालिक के लिए,
भुला दिया इस वफादार को, नये सदस्य के लिए?

कही हाथी, तो कही गाय,
हिंसा के लिए इंसान भी कम पड गऐ?
अरे अपने जैसे जी रहे इंसान को ना छोड़ा,
जानवर बोले: हम बच सके,
ऐसा बीज हम ने कहाँ कुछ बोया।

अपने आप को सबसे अन्नत समझने वाले जीवों,
याद रखो कि, ऊँचा दर्जा इसलिए मिला,
कि असहाय को दर्द से बाहर निकल सको।
निर्बल को खतरे से बचा सको।
नाकी अपने बल का प्रदर्शन करके,
कमजोर के जिवन में बाधा ड़ाल सको। 
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