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8 साल की राशि अपनी दादी के साथ रोज मंदिर जाती थी । दादी के हाथ में पूजा की थाली और जल से भरा लोटा होता तो राशि के हाथ में फूलों की छोटी सी टोकरी राशि हर रोज अपनी बालकनी में लगे गैंडे, चमेली और गुलाब के पौधों से इकट्ठा करती और भगवान को चढ़ाने के लिए अपनी छोटी-सी फूलों की टोकरी तैयार करती । यह राशि की रोज की दिनचर्या में शामिल था । 1 दिन राशि नहीं अपनी दादी से कहा कि दादी आप रोज मंदिर क्यों आती हो ? हमारे घर में भी तो एक छोटा सा मंदिर है आप वहीं पर पूजा क्यों नहीं कर लेती । दादी ने कहा जैसे तुम रोज स्कूल जाती हो ना शिक्षा प्राप्त करने के लिए आगे बढ़ने के लिए वैसे ही मैं भी यहाँ आती हूँ भगवान से अपने अच्छे जीवन की कामना करने के लिए । तुम्हें पता है हम भगवान से जो भी सच्चे दिल से मांगते हैं वह कभी ना कभी पूरा हो ही जाता है । क्या दादी अगर मैं भी कुछ मांगू तो क्या मुझे भी मिल जाएगा ? हाँ बेटा बस आपकी प्रार्थना सच्चे हृदय और निष्ठा से होनी चाहिए । अरे वाह दादी यह तो आपने मुझे बहुत अच्छी बात बताई । अब मुझे जब भी कोई परेशानी होगी तो मैं अपनी परेशानी भगवान जी को बता दूंगी और वह मेरी मुश्किल दूर कर ही लेंगे । ऐसा सोचते हुए राशि और उसकी दादी वापस घर आ गई 8:00 बजे राशि की स्कूल बस भी आ गई और राशि बस में बैठकर स्कूल जाने लगी रास्ते में बस में बैठे हुए उसे ख्याल आया कि अरे आज तो विज्ञान का टेस्ट है और उसने उसकी कोई तैयारी नहीं की थी यह सोचकर राशि मन ही मन घबराने लगी तभी उसे दादी की कही बात याद आ गई कि हम जो भी भगवान से मांगते हैं वह पूरा हो ही जाता है उसने आंखें बंद की और बस नहीं भगवान से प्रार्थना की कि हे भगवान आज मुझे इस परीक्षा से बचा लो अगली बार मैं सच में अच्छे से तैयारी करूंगी । बस से उतरकर राशि ने सोचा आज देखती हूँ कि भगवान मेरी सुनते हैं या नहीं । वह कक्षा में पहुंची और अपनी सीट पर जाकर बैठ गई तभी उसकी सहेली अमीषा उसके पास आई दोनों ने एक दूसरे को गुड मॉर्निंग कहा और आपस में बातें करने लगी अमीषा ने उससे विज्ञान की परीक्षा के बारे में पूछा तो बताओ कैसी है तुम्हारी तैयारी । राशि ने कहा अरे कहाँ मैं तो कल रात भूल ही गई इसलिए कुछ भी याद नहीं किया । मैं तो कहती हूँ भगवान करे यह परीक्षा आज कल ही जाए तो अच्छा है आगे से मैं अच्छे से तैयारी करूंगी । तभी कक्षा में कक्षा अध्यापिका प्रवेश करती है और सभी की उपस्थिति लगाने के बाद कक्षा को सूचित करती हैं कि आज विज्ञान की अध्यापिका अनुपस्थित है इसीलिए आज वह कक्षा खेल शिक्षक द्वारा ली जाएगी । खेल के पीरियड के नाम से ही सभी बच्चों में खुशी की लहर दौड़ गई और राशि की खुशी का तो जैसे ठिकाना ही ना रहा हो । वह मन ही मन अपनी दादी और भगवान को धन्यवाद देने लगी और सोचने लगी कि भगवान हमारी इच्छाएं सच में पूरी करते हैं । अब तो राशि की आस्था भगवान में दिनोंदिन बढ़ने लगी है । हर बात में यह कहने लगी कि भगवान करे ऐसा हो जाए भगवान करे ऐसा हो जाए मार्च 2020 की परीक्षा के बाद राशि का परीक्षाफल घोषित हुआ प्राची को अच्छे अंक प्राप्त हुए सभी राशि को याद आया कि परीक्षा फल के बाद होली को मिलाकर बस 5 दिन की छुट्टियां है । मैं चाहती थी कि वह नानी के घर जाएं और अपने मामा जी के बच्चों के साथ खेल भगवान से प्रार्थना की हे भगवान कुछ ऐसा करो कि मैं अपनी नानी के यहाँ भी जाऊं और वहाँ खूब मस्ती करो कुछ ऐसा करो कि लंबी छुट्टी पड़ जाए और मुझे खूब मस्ती करने का मौका मिले । राशि अपनी मम्मी के साथ नानी के घर चली गई तभी अचानक यह खबर फैलने लगी कि देश में कोरोना नाम की बीमारी पैर पसार चुकी है । कृपया कोई भी अपने घर से बाहर ना निकले देश में 21 दिन का लॉक घोषित हो गया । सब के कारण राशि अपने मामा जी के घर पर ही फस गई और वहाँ से वापस आ ही नहीं पाई तो यह खबर सुनकर राशि मन ही मन बहुत खुश हुई और भगवान को धन्यवाद देने लगी । लेकिन जैसे-जैसे यह समय बढ़ता गया अब घर में बोर होने लगी विद्यालय से भी सूचना आ गई कि अब से सारी कक्षाएं ऑनलाइन होंगी । मामा जी के घर से ही उसे विद्यालय की कक्षाएं पूरी करनी पड़ी राशि को अपने घर विद्यालय और दोस्तों की याद सताने लगी है सोचने लगी कि कब यह सब ठीक होगा और कब वह अपने घर वापस जाएगी । आज पूरे 6 महीने हो गए लेकिन राशि का विद्यालय अभी भी इस महामारी के कारण बंद है । किसी ने अपनी माँ से पूछा माँ यह सब कब ठीक होगा हम कब अपने घर वापस जाएंगे । हम कब पापा से मिलेंगे राशि की माँ ने कहा भगवान जाने कब होगा यह सुनकर राशि ने अपनी माँ को बताया कि मैं भगवान से तो मैं नहीं ऐसा करने को कहा था ऐसा ही मैं नहीं ऐसा मांगा था कि भगवान मगर यह कभी नहीं सोचा था कि यह सब इतना लंबा चलेगा । राशि की माँ नहीं यह सुनकर राशि को बड़े प्यार से समझाया कि भगवान से हमेशा मांगना ही नहीं चाहिए बल्कि भगवान हमें जो भी कुछ देते हैं हमें उसके लिए भगवान का धन्यवाद देना चाहिए क्योंकि भगवान हमारी सारी इच्छाएं पूरी करते हैं । राशि को धीरे धीरे सारी बातें समझने लगी और सोचने लगी कि यदि सच में कुछ मांगने की बजाय उसने भगवान का शुक्रियादा किया होता तो आज शायद यह दिन कुछ और होता । तब से राशि ने निर्णय ले लिया कि अब से मैं भगवान से कुछ नहीं मांगेगी और सिर्फ भगवान को धन्यवाद देगी, आज राशि सिर्फ भगवान को धन्यवाद ही देती है।।
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