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कल्पनाशक्ति

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ये कहानी है एक छोटे बच्चे की जो बचपन से लेकर बड़े होने तक अपनी कल्पना की दुनिया मे इस कद्र खोया रहता है, कि एक दिन वह अपनी कल्पनाशक्ति के दम पर वो सब हासिल कर लेता है जो उसने अपने लिए सोचा होता है।
ये बात है आज से कुछ वर्षो पहले की, जब रोहन का जन्म हुआ, रोहन बचपन से ही अपनी सपनो की दुनिया मे खोया रहता, कभी मन ही मन ख़यालो मे वो अपनी साइकिल की राइडिंग करता तो कभी बर्फीले पहाड़ों मे स्केटिंग करने के सपने देखता, कभी दोस्तों के साथ प्लेन की उड़ान भरने के सपने देखा करता। बचपन तो उसका केवल सपने देखने मे ही निकल गया, लेकिन जैसे जैसे वह बड़ा हुआ उसे अपनी कल्पनाशक्ति पर विश्वास होने लगा, उसने ये सोच लिया कि हर दिन सोचा हुआ एक दिन जरूर पूरा होगा, फिर क्या था उसने अपने सभी सपनो कि एक लिस्ट तैयार की और लग गया सोचने मे। उन्हें पूरा करने के जूनून ने उसे अंदर तक शक्तिवान बना दिया था। रात को सोने से पहले ऑर्डर सुबह उठते ही वह अपने करियर, अपने भविष्य के बारे मे सोचता और एक सक्सेसफुल बिज़नेस मैन बनने का ख्वाब देखा करता।
यही नहीं उसकी ये ख्वाहिशे इस कद्र तक बढ़ चुकी थी कि इसके लिए वो कुछ भी करने को तैयार रहता था। जब बड़े होने पर सब्जेक्ट लेने कि बात आयी तब उसने कॉमर्स चुना, तब उसके बोर्ड एक्साम्स मे 90 % अंक हासिल किये। अब आगे उसे बिजनेसमैन बनना था, तो उसने हायर स्टडीज के लिए अपने पिताजी से बात कि लेकिन घर के आर्थिक हालत ख़राब होने की वजह से रोहन के पिता ने उसे आगे पढ़ने के मना किया, फिर क्या था रोहन को अपनी पढाई बीच मे ही छोड़नी पड़ी। लेकिन कहते है ना किसी की इच्छाशक्ति के आगे कोई चीज़ नहीं जीत सकती। रोहन ने अपनी पढाई तो छोड़ दी लेकिन उसने खाली रहने की बजाय अपने परिवार की आर्थिक सहायता करने की सोची, उसके मन ने, कल्पनाओ ने कभी बिजनेसमैन बनने की आस नहीं छोड़ी, उसकी कल्पनाशक्ति हर रोज उसे बिजनेसमैन बनने के लिए प्रेरित करती थी, जितना समय वह अपनी पढाई से दूर रहा उसने कई बड़े बड़े व्यवसाय मे छोटी छोटी नौकरी की, जैसे कभी कपड़ो की दूकान पर हेल्पर का काम तो कभी टिफ़िन डिलीवरी सेंटर पर टिफ़िन बाटने का काम, कभी होकर का काम, तो कभी एजेंसी का काम, इन सभी कामो को करके उसने ना सिर्फ कुछ छोटी छोटी रकम अपने परिवार के लिए जुटाई बल्कि कई बिज़नेस के गुर भी सीखे, जो शायद उसे प्रक्टिकली और कहीं से इतना जल्दी नहीं मिल पाते। अब तक नौ महीने बीत चुके थे, और रोहन के पिताजी के आर्थिक हालत भी सुधरने लगे थे, उसके पिता का प्रमोशन हो चूका था ,रोहन के पापा ने अपने बेटे की पढाई दुबारा शुरू करवाने का निर्णय लिया , फिर क्या था, रोहन ने कुछ ही सालों मे अपना बिज़नेस डिप्लोमा पूरा किया, और आज वह एक काबिल बिजनेसमैन बनके तैयार हो गया है, अब जब भी वह अपने पुराने दिनों के बारे मे सोचता है तब उसे वो दिन बुरे नहीं बल्कि अच्छे लगते है क्योंकि इन दिनों ने ही उसे उसकी मंजिल तक पहुंचने मे मदद की, किसी ने सच ही कहा है किसी भी आदमी के बड़े कामो की शुरुआत उसके छोटे कामो से ही होती है, और ये शायद रोहन की कल्पनाशक्ति और इच्छाशक्ति का ही कमाल था जिसने उसे संघर्ष के दिनों मे भी टूटने की बजाय डटके काढ़े रहने का सबक सिखाया।
शिक्षा -"कोई भी व्यक्ति अपनी कल्पनाशक्ति और इच्छाशक्ति के दम पर अपने सपनो को हकीकत मे तबदील कर सकता है।
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