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सच्चा मित्र

सच्चा मित्र

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में एक ओर मनुष्य सफलता पाने के लिए स्वयं को भूल चुका है और दूसरों को प्रभावित करने के लिए झूठा दिखावा करता है, 
वहीं दूसरी ओर अपने भीतर के सूनेपन को भरने के लिए उसको एक सच्चे दोस्त की जरूरत होती है। इस कपटपूर्ण समाज से भागकर मनुष्य को अपने मन की शांति किसी मूक प्राणी से मित्रता करके मिलती है जिसके सामने वह खुलकर हंस सकता है और रो सकता है।
इस प्रकार वह अपने उद्वेलित मन को शांत करता है। इस प्रकार जहाँ एक ओर मनुष्य का आपसी रिश्तों में चारित्रिक पतन परिलक्षित होता है वहीं दूसरी ओर, जानवर, विशेषतया कुत्ता, अपने सरल प्रेम एवं वफादारी जैसे गुणों के कारण मनुष्य का सच्चा मित्र प्रतीत होता है।
संजय कुमार लांबा के और लेख पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें: https://nazmehayat.com/members/sanjay-kumar-lamba/
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