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वैसे तो इंसानी फ़ितरत कई होती हैं,
कुछ अच्छी तो कुछ बुरी भी होती हैं,
अच्छाई आज के ज़माने में ढक गई है,
बुराइयाँ लाख अपने अंदर पनप गई हैं।

कुछ अच्छाइयों में वफ़ादारी अहम है,
इसके बिना जीवन बिलकुल फ़िज़ूल है,
यह बनाती है इंसान को जीने के लायक़,
ग़र ना हो तो किस कहलाये नालायक।

वफ़ादारी सीखते हैं घर के वसूलों से,
जो दिखे बड़ों के आदर्श और मूल्यों में,
बनते हैं बड़े होकर इंसान वही हम,
जो सीखें बचपन में बड़ों से हम।

कहते हैं वफ़ादारी नमक के समान है,
खिलाया जिसने, निभानी उसके संग है,
ख़ून में नमक जब तक है उसका,
नमक हलाल बने रहो तब तक उसका।

ग़र करी कभी भी बेमानी संग किसीके,
नमक हराम बुलाए जाओगे तुम उसके,
कटेगी जो नाक तुम्हारी इस जग में,
साथ तुम्हारे होंगे बदनाम तेरे अपने।

वफ़ादारी निभाना बहुत कठीन कार्य है,
ना निभाना सिर्फ़ बुज़दिलों का कार्य है,
जो होते हैं मौक़ापरस्त जीवन में,
वो होते नहीं जीवन में कभी किसी के।

वफ़ादारी निभाई जाती जीवन में सभी से है,
इसमें ग़लती की गुंजाइश ज़रा सी भी नहीं है,
हो चाहे देश, परिवार, हमसफ़र या दोस्त तेरा,
हो चाहे वो तुझे काम देने वाला सेठ तेरा..
निभानी तो पड़ेगी हर क़ीमत दे तुझे,
इस से बढ़कर नेकी ना मिलेगी करने को तुझे।

कहने को तो जानवर को बताया है,
इंसान से कहीं ज़्यादा वफ़ादार जग में,
है यह अमिट सच्चाई जीवन की जग में,
इंसान होता है लाचार अपने लालची मन से,
कभी भी दे सकता है धोखा किसीको...
चाहे भला वो उसे अपने तन-मन से।

वफ़ादारी मिलती है उपरवाले के रहम से,
फिर क्यूँ त्यागे उसे हम अपने बुरे करम से,
माना कि बने रहना ईमानदारी की राह पर,
है बड़ा कठीन कार्य जीवन की डगर पर।

परंतु कर ध्येय अपना चट्टान सा मज़बूत तू,
रह अडीग अपने ईमान पर सदा तू,
देख कैसे ईमानदारी की दुआएँ देगें जग में,
नाम होगा रोशन तेरा स्वर्णाक्षरों से जग में।

ललित सारस्वत के और लेख पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें: https://nazmehayat.com/members/lalitsaraswat/
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1 Comment
  • Madhuri Rathore
    Posted at 22:22h, 13 October Reply

    Wah Wah…… Very nice 🤩🤩

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