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विचारों का भेदभाव (सकारात्मक पर नकारात्मक क्यों )

विचारों का भेदभाव (सकारात्मक पर नकारात्मक क्यों )

ये तो हम सभी बख़ूबी जानते है की आजकल लड़किओं को लेकर कितने मामले चर्चा में रहते हैं, फिर चाहे वो उनकी सुरक्षा हो, या उनकी शिक्षा। तो ऐसी ही वर्तमान स्तिथितिओं पर निर्धारित एक पहलु को लेकर चलते हैं, और देखते हैं कि आख़िर क्यों सोचते हैं हम कभी कभी इतना गलत। तो स्थिति कुछ यूँ है, कि एक लड़की को मिला मौका कदमों को उठाने का और एक कदम सफलता कि और बढ़ाने का, पढ़ाई के लिए विदेश जाने का। एक पैसा खर्च नहीं था होना, उसकी काबिलियत पर गया था, उसको चुना। घर में ख़ुशी का वातावरण सा छाया, तभी अचानक उसके पिता का मन घबराया। खुश तो थे वो भी बहुत, आखिर बेटी की थी कामयाबी, किन्तु उस ख़ुशी से पहले हो गये वो दुखी, सोचकर की दुनिया भी तो है कितनी फरेबी। क्या होगा इसकी सुरक्षा का, कैसे पढ़ाऊँ पाठ इसको आत्म-ऱक्षा का। पिता का दिल है न, चिंता तो होगी ही, यहाँ आ गई बात सकारात्मकता पर नकारात्मकता की। तो क्यों हुआ ऐसा, क्या वजह है इन विचारों में पल-पल के परिवर्तन की? विचारों के इस भेदभाव का कोई एक कारण नहीं, तो किसी एक वजह को सही ठहराना भी क्या होगा सही? शायद नहीं, उस पिता के विचारों को बदला समाज ने, जी हाँ, समाज की बढ़ती कुरीतियों ने। कैसे जब कोई इंसान बहुत ज्यादा सोचता है या सही से पहले गलत पहलु उसके दिमाग में आते हैं तो हम अपने विचार रख देते हैं कि ये तो बहुत 'नेगेटिव' है, इसके साथ रहकर हमारे भी विचार खराब हो जायेंगे, परन्तु कभी उस इंसान को लेकर ये नहीं सोचते की उसने ज़िन्दगी में कितना कुछ देखा होगा, जिसने उसको मज़बूर किया होगा सही से पहले ग़लत पहलु को देखने के लिए।
यहाँ एक बात पर और गौर फरमाइयेगा, किसी इंसान को एक दम से 'नेगेटिव' कहकर हम खुद भी तो नकारात्मकता के ख्याल पहले उत्पन कर लेते है, वरना, सकारात्मक ख्याल तो ये होना चाहिए था की हम उस इंसान की मज़बूरियां देखे, उसने ज़िन्दगी में क्या सहा उसको महसूस करें।
ख़ैर, सकारात्मक सोच का परिवर्तित होना हमारे दिमाग की उपज है इससे ज्यादा कुछ भी नहीं। हम जो देखते हैं, जो महसूस करते हैं, ज़िन्दगी से जो अनुभव करते हैं, उन अनुभवों से जो सीखते हैं उसी के आधार पर हमारी सोच में परिवर्तन आते हैं। पूर्व घटित नकारात्मक घटनाएँ हमारे दिमाग में इस कदर घऱ कर जाती हैं कि हमे बाधित करती हैं नकारात्मकता के ख्यालों को मन में बसाने के लिए।
मनोवैज्ञानिक इस स्तिथि को 'नकारात्मक पूर्वाग्रह' का नाम देते हैं। शोध्कर्ताओं के अनुसार प्राचीन काल में यह माना जाता था कि बुरी चीजों पर अधिक ध्यान देने और अच्छी चीजों को नजरअंदाज करने की हमारी प्रवृत्ति संभवतः विकास का परिणाम है। मानव इतिहास में इससे पहले, दुनिया में बुरे, खतरनाक और नकारात्मक खतरों पर ध्यान देना वस्तुतः जीवन और मृत्यु का मामला था। जो लोग खतरे के अधिक ध्यान में थे और जिन्होंने अपने आसपास की बुरी चीजों पर अधिक ध्यान दिया, उनके बचने की संभावना अधिक थी। तो इस भेदभाव भरी सोच का एक कारण हमारे 'जीन' भी हो सकते हैं जो हमारे पूर्वजों के कारण हमारे अंदर स्तिथ हैं। एक पहलु यह भी है कि यदि मन में कई नकारात्मक विचार हैं, तो इसका मतलब है कि बहुत सारी अधूरी इच्छाएं और अपेक्षाएं हैं। दिमागी डिप्रेशन भी नकारात्मकताओं की उत्पन्नता को बढ़ावा देता है। सीधे शब्दों में कहें तो सोच का नकारात्मक होना कोई बीमारी नहीं, मजबूरी है, या फिर दिमाग का खेल, अन्य कुछ भी नहीं।
20 Comments
  • Kartik Bhardwaj
    Posted at 10:59h, 19 October Reply

    🙄🙄👍👍 really awesome….

  • Manasvini Nag
    Posted at 17:05h, 19 October Reply

    U r too good yara❤❤

  • Sampada Sharma
    Posted at 20:11h, 19 October Reply

    Awesome 👌👌

  • Muskan kaushal
    Posted at 20:14h, 19 October Reply

    Brilliant

  • Kirti
    Posted at 20:19h, 19 October Reply

    Marvellous🌟

  • Shivali
    Posted at 20:22h, 19 October Reply

    Very thought provoking💜💜

  • Dimpy
    Posted at 20:27h, 19 October Reply

    Amazing 👏👏

  • Tanya
    Posted at 20:37h, 19 October Reply

    So good!

  • Vishakha garg
    Posted at 20:50h, 19 October Reply

    Thoughtful lines dii..very nice👍☺️

  • Vanshika Yadav
    Posted at 21:17h, 19 October Reply

    Amazing lines💕

  • shruti
    Posted at 21:36h, 19 October Reply

    Nice

  • Shivom
    Posted at 21:42h, 19 October Reply

    Meri Beti 🥰🥰🥰🥰

  • Mukul
    Posted at 21:44h, 19 October Reply

    Wow just amazing

  • Vandana
    Posted at 21:46h, 19 October Reply

    Wow🤩🤩🤩

  • Annapurna Bhardwaj
    Posted at 21:49h, 19 October Reply

    Choice of words matter a lot….you need to improve a bit…. Don’t only follow the road try to climb higher stairs too
    Nice example and quite impressive
    Keep going……
    Lots of love and a big heart 💞 to you dear ❤️❤️😁😁

  • Tina
    Posted at 21:58h, 19 October Reply

    Nice 👌😊

  • Sejal aggarwal
    Posted at 09:45h, 20 October Reply

    👍👏great

  • Monika Goyal
    Posted at 11:59h, 21 October Reply

    Nice

  • Shyam
    Posted at 12:02h, 22 October Reply

    To good

  • Kirti
    Posted at 23:22h, 22 October Reply

    😍😍🏵️

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